किस मुहूरत में दिन निकलता है ?
शाम तक सिर्फ़ हाथ मलता है
वक़्त की दिल्लगी के बारे में
सोचता हूं तो दिल दहलता है
दोस्तों ने जिसे डुबोया हो
वो ज़रा देर से संभलता है
हमने बौनों की जेब में देखी
नाम जिस चीज़ का सपलता है
तन बदलती थी आत्मा पहले
आजकल तन उसे बदलता है
एक धागे की बात रखने को
मोम का रोम-रोम जलता है
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X