मरहूम पत्रकार और लंकेश पत्रिका की संपादक गौरी लंकेश की याद में नई दिल्ली में एक संगीतमय और कवितामय शाम का आयोजन किया गया। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुए इस कार्यक्रम अच्युतानंद मिश्रा, अशोक कुमार पांडेय, रविकांत, रज़ा हैदर, रीला, रूहानियत, सैफ़ मोहम्मद, संगवारी, सुजाता और वागीश झा जैसे चर्चित नाम ने शिरकत की।
बेंगलुरु में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर को हत्या कर दी गई। मशहूर कन्नड़ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश चर्चित कन्नड़ टैब्लॉइड लंकेश पत्रिके की संपादक भी थीं।
गौरी लंकेश की याद में आयोजित कार्यक्रम 'गौरी के नाम प्रतिरोध की एक शाम' कार्यक्रम में देश के तमाम प्रबुद्ध, लेखक, पत्रकार से खचाखच भरे हॉल में कलाकारों और कवियों ने शिरकत की। सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आगाज़ वागीश झा के ब्रेख़्त, साहिर लुधियानवी, अवतार सिंह पाश और शलभ श्री राम सिंह की कविताओं के गीत के एक कोलाज से हुआ। गानों का ये कोलाज अस्सी के दशक से सक्रिय सांस्कृतिक समूह जुगनू के लिए किया गया था। बिना साजो सामान के साथ इन गानों से उपस्थित लोगो में 'उदास मौसम के ख़िलाफ़' लड़ाई जारी रखने के साथ 'जहाँ पे लफ़्ज़े अम्न एक ख़ौफ़नाक राज़ हो, के ख़िलाफ़ इंकलाब की गुहार वागीश की दिल को छूने वाली आवाज़ से दिलों में उतर गयी।
रूहानियत ने 'अरे रुक जा रे बन्दे' से अपनी प्रस्तुति शुरू की और जॉन लेनन के प्रसिद्ध गीत इमेजिन के साथ। इलाहाबाद से आये पत्रकार और कवि रविकांत ने इतिहास और अन्य कविताएँ सुनाईं जो बहुत मौजूं थीं। राजा हैदर ने 'एक समय में' और 'हल किसी की जान नहीं ले सकता, इसलिए उसे कोई सलामी नहीं मिली', 'दुआ', 'मेरी 75 साल की माँ दोज़नू नमाज़ नहीं पढ़ सकती' जैसी कई कविताएं पढ़ीं जिसे बहुत सराहा गया। सांस्कृतिक ग्रुप रेला ने बहुभाषी गीतों के कोला रेला से अपनी प्रस्तुति शुरू की। बाद में उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत गौरी को समर्पित किया जो इस प्रकार था 'सहीद मनके...'।
इस कवितामय शाम में पढ़ी गईं कविताओं का वीडियो देखिए -
8 वर्ष पहले
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