अब से पहले इस दुनिया ने ऐसा संग्राम न देखा था
निष्ठा ने भरत न देखा था, दृढ़ता ने राम न देखा था
रामनवमी के अवसर पर कवि चिराग़ जैन ने जब ये पंक्तियां नई दिल्ली के आईपैक्स भवन में सुनाईं, तो सभागार में मानों चित्रकूट का वह दृश्य साक्षात उतर आया, जब राम को अयोध्या वापस लाने के लिए भरत गुरुजनों, कुटुम्ब और अयोध्यावासियों के साथ वहां पहुंचे थे। ये पंक्तियां चिराग़ जैन कृत 'पुरुषोत्तम' की हैं, जिसकी पहली प्रस्तुति 6 अप्रैल को नई दिल्ली के आईपैक्स भवन में की गई।
पुरुषोत्तम के आइडिया पर पूछे जाने पर चिराग़ जैन कहते हैं कि इस कार्यक्रम के आयोजन की पूरी योजना स्वतः बनी है। मैं तो इस आयोजन का केवल एक किरदार हूँ। इसका निर्देशन किसी अदृश्य सत्ता के इंगित पर हो रहा है। अभी तो सिर्फ अयोध्या कांड की कविता के रूप में संगीतमय प्रस्तुति पेश की गई है, आगे भी यह यात्रा चलती रहेगी। कोशिश यही है कि लोग राम के जीवन से प्रेरणा ले सकें।
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