सुविख्यात नवगीतकार देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' का आज सुबह निधन हो गया है। यह दुखद सूचना स्वयं कुँअर बेचैन ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी है।
1 अप्रैल 1934 में आगरा जनपद में जन्मे देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' सुविख्यात नवगीतकार में से एक थे जिनके गीतों पर सैंकड़ों छात्रों ने शोध किया है। उनके तेरह नवगीत संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें हिन्दी संस्थान लखनऊ द्वारा ’साहित्य भूषण’ सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका था। कुँअर बेचैन लिखते हैं कि, 'देवेन्द्र जी अदम्य साहस और जीवट के धनी, अत्यंत संवेदनशील, उदार और सबके प्रेरक, समस्त काव्य - विधाओं में पारंगत साहित्य-पुरोधा, अपनी छत्र-छाया में नवांकुरों को भी पुष्पित और पल्लवित करने वाले विशाल वटवृक्ष थे'।
देवेन्द्र जी के निधन से साहित्य जगत में शोक व्याप्त है।
जब भी सूरज को हथेली पर लिया है मैंने
सारी दुनिया को अँधेरा ही दिया है मैंने
मेरी मंशा थी कि सड़कों को नदी में बदलूँ
प्यास के वक़्त पसीना ही पिया है मैंने
ख़ार आलूदः दरख़्तों से हवा गुज़री थी
उसका हर ज़ख़्म रिफ़ादों से सिया है मैंने
मेरे लफ़्ज़ों में निहाँ है जो मआनी समझो
कुछ रिवायत में इज़ाफ़ा ही किया है मैंने
ज़िन्दगी तू तो सितमगर ही ही रही है मुझपर
हर अज़ीयत को ही हँस-हँस के जिया है मैंने
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