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दिग्गज कवियों की उपस्थिति से गूंज उठी काव्य कैफ़े की महफ़िल 

दिग्गज कवियों की उपस्थिति से गूंज उठी काव्य कैफ़े की महफ़िल
                
                                                         
                            जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे
                                                                 
                            
भारत माता की जय कहकर फाँसी पर चढ़ जाते थे
जिन बेटों ने धरती माता पर कुर्बानी दे डाली
आजादी के हवन-कुंड के लिये जवानी दे डाली

दूर गगन के तारे उनके नाम दिखाई देते हैं
उनके स्मारक भी चारों धाम दिखाई देते हैं
वे देवों की लोकसभा के अंग बने बैठे होंगे
वे सतरंगे इंद्रधनुष के रंग बने बैठे होंगे
उन बेटों की याद भुलाने की नादानी करते हो
इंद्रधनुष के रंग चुराने की नादानी करते हो 
 
काव्य कैफ़े में जब डाॅ. हरिओम पंवार ने शहीदों को याद करते हुए यह पंक्तियां पढ़ी तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गये। माहौल बन गया। पंक्तियां उन्होंने आज़ादी के लिए शहीद होने वाले जवानों को समर्पित की।  आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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