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शनिवार शाम सजेगी काव्य कैफ़े की महफ़िल. युवा शायर होंगे शामिल

kavya cafe episode on 6 may 2023
                
                                                         
                            अमर उजाला काव्य कैफ़े के सिलसिले में अगली सीढ़ी 6 मई को जुड़ने वाली है जिसमें दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्र से आए लोग अपनी ग़ज़लें पढ़ेंगे। इनमें शामिल हैं 
                                                                 
                            

राहुल गुर्जर

मेरे क़रीब आ तू देख मुझको सामने से 
मैं तुझको दिखता हूँ या तू दिखाई देता है

किसी गाड़ी के आगे आ गया हूँ
मैं दुनिया देखने निकला था पैदल 

हर्षवर्धन 
हर्षवर्धन औरंगाबादी बिहार से हैं। अभी पत्रकारिता में स्नातक कर रहे हैं। 

अलंकृत श्रीवास्तव 
अलंकृत के शेर हैं -
उन्हें दरिया कभी चंदा कभी संसार दिखता है,
मैं आशिक़ हूँ मुझे आँखो में केवल प्यार दिखता है।

लिख रहा हूँ मैं ऐसी चिट्ठियाँ मोहब्बत में
जैसे मुझको मिलनी हों डिग्रियाँ मोहब्बत में 

अमनप्रीत
रोहतक के अमनप्रीत अपने कॉलेज से समय से कविता, ग़ज़लें लिख रहे हैं। किताबें पढ़ने के शौकीन हैं। 
 
आज एक दूजे को छोड़ जाना है हमने
आओ आख़िरी बारी शहर साथ में देखें

विकास राजपूत
दिल्ली के विकास जब 16 साल के थे, तब ही से कविताएं लिख पढ़ रहे हैं। उनका एक शेर है कि 

अपना मक़ाम है यहां हर एक से जुदा
शीशे को छोड़ दीजिए पानी में देखिए
 
3 वर्ष पहले

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