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जमेगी अदब और इल्म की महफ़िल, साहित्य और सिनेमा जगत के कलाकार जीतेंगे लोगों का दिल

'जश्न-ए-अदब' 2019 को लेकर हुई प्रेस वार्ता
                
                                                         
                            
'जश्न-ए-अदब' के संस्थापक सचिव कुंवर रंजीत चौहान ने साहित्योत्सव को समय की मांग बताते हुए आज एक प्रेस वार्ता की। जिसमें उन्होंने 'जश्न-ए-अदब' की विशेषता और साहित्योत्सव 2019 के कार्यक्रमों के बारे में बताया।

साहित्य के प्रेमी जिस महोत्सव की प्रतीक्षा करते रहते हैं 8, 9 और 10 नवंबर की तीनों तिथियों को सुरक्षित कर लीजिये क्योंकि आ रहा है 'आठवें साहित्योत्सव' का दूसरा चरण। समय हर क्षण के साथ हमें उस दिन की दिशा में ले जा रहा है जब जामिया हमदर्द, दिल्ली में इल्म, फ़न, तहज़ीब, अदब के रंगों से हर बरस की तरह 'जश्न-ए-अदब' आपके लिए सजा रहे हैं ऐसी यादगार रंगोली जिसके रंग आपके ज़हन में हमेशा के लिए छाप छोड़ देंगे।

रूह को ताज़ा और दिल को शाद कर देने वाले इस माहौल में आपको एक ऐसी दुनिया मिलेगी जो नई भी लगेगी और अपनी भी। साहित्योत्सव की तैयारियां शिद्दत से हो रहीं हैं। तहज़ीब की गरिमा के साथ संस्कृति का नाज़ बढ़ रहा है, फिर एक बार 'जामिया हमदर्द' और 'जश्न-ए-अदब' ऐसे मिलेंगे जैसे गंगा और जमुना। दर-असल 'जश्न-ए-अदब' की सभ्यता ही ये है कि यहां साहित्य और सृजनिता का अद्भुत और असाधारण संगम होता है। जिसे अविस्मरणीय अनुभव बना देना ही हमारा संकल्प है।
 

कुंवर रंजीत चौहान जो ख़ुद एक मक़बूल शायर हैं। पूरी दुनिया में अपनी मोतबर और मुख़्तलिफ़ शायरी के लिए बुलाए जाते हैं। उन्होंने लगभग 10 बरस पहले अपनी अच्छी-खासी नौकरी को अलविदा कहकर साहित्य की सेवा में अपने हिस्से का सहयोग देने का संकल्प लिया और उसका परिणाम ये है कि साहब दिल्ली में तीन दिनों के लिए एक छोटा-सा हिंदुस्तान बसाने की बड़ी-सी कोशिश करते हैं।

और इस बड़ी कोशिश का बड़ा और क़ामयाब नतीजा है कि ये नाम  'जश्न-ए-अदब' नामवर हो चुका है। जामिया हमदर्द के वी सी सय्यद एहतेशाम हसनैन साहब की साहित्योत्सव में सदा ही एक प्रेरणास्पद भूमिका रही है, ये उन्हीं की सोच थी कि यूनिवर्सिटी कैंपस में कार्यक्रम के आयोजन से न सिर्फ युवाओं को अपनी सांझी विरासत से जुड़ने का मौका मिलेगा बल्कि आने वाले समय में इस तरह के और आयोजन करने की प्रेरणा भी मिलेगी।

'जश्न-ए-अदब' के इस तीन तीनों के महोत्सव में हर बार की तरह देश-विदेश से कलाकार, साहित्यकार, रंगकर्मी, संगीतकार, गायक और हिंदी व उर्दू ज़बानों में काम करने वाले सभी श्रेष्ठतम लोग शामिल होते हैं। इस बरस भी फिल्म, मीडिया, थिएटर, कविता, संगीत, गायन सभी क्षेत्रों के कलाकार अपनी कला के दर्शन और प्रदर्शन से जश्न में चार चाँद लगाने वाले हैं।
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6 वर्ष पहले

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