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फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला 2026 में इंडियन नेशनल स्टैंड का उद्घाटन

हलचल
                
                                                         
                            फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले में इंडियन नेशनल स्टैंड का उद्घाटन आज दीपक बंसल, कार्यवाहक महावाणिज्यदूत, भारत और प्रख्यात लेखक एवं समाजसेवी संदीप भूटोरिया ने किया। इस अवसर पर फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला की उपाध्यक्ष क्लाउडिया कैसर, आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह, साहित्य अकादेमी के सचिव वरुण गुलाटी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निर्देशक हितेंद्र मिश्र, केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के निदेशक प्रो. आर. चंद्रशेखरन व अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे।
                                                                 
                            

स्वागत भाषण में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले में इंडियन नेशनल स्टैंड के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस स्टैंड की परिकल्पना भारतीय पुस्तकों को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने और भारतीय साहित्य और भाषाओं को एक छत के नीचे प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने दोहराया कि यह स्टैंड किसी एक प्रकाशक का नहीं, बल्कि भारत के सभी प्रकाशकों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करता है और उनके माध्यम से पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है।

दीपक बंसल ने कहा कि इस वर्ष भारत और जर्मनी के संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के कारण फ्रैंकफर्ट में इंडियन नेशनल स्टैंड की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि मेले में भारत की उपस्थिति दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने में सहायक होगी। उन्होंने इंडियन नेशनल स्टैंड पर पुस्तकों की सामूहिक प्रदर्शनी की सराहना की।

पढ़ने के महत्व पर बोलते हुए संदीप भूटोरिया ने कहा कि पुस्तकें हमें भारत के जीवन, संस्कृति और इतिहास के विभिन्न पहलुओं को जानने-समझने में मदद करती हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की विविधता और देश की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने में अनुवादों की भूमिका पर जोर दिया।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम ने स्टैंड की परिकल्पना और इसके विभिन्न तत्वों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस स्टैंड को विशेष रूप से प्रेमचंद और सुमित्रानंदन पंत जैसे भारतीय साहित्य के प्रमुख रचनाकारों की कृतियों पर केंद्रित करके तैयार किया गया है। ताकि लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी को उनकी रचनाओं के करीब लाया जा सके।

उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रकाशित आधुनिक भारतीय कालजयी बाल कहानियों के जर्मन और स्पेनिश अनुवादों का विमोचन किया गया। इन पुस्तकों में प्रेमचंद की मिट्ठू, भीष्म साहनी की 'दो गौरैया' और 'चमगादड़ का रस' सुदर्शन की 'साइकिल की सवारी, अमरकांत की 'बहादुर', विष्णु प्रभाकर की सबसे सुंदर लड़की, और आचार्य शिवपूजन सहाय की 'कुंजी' शामिल है। यह शृंखला विशेष रूप से युवा पाठकों को भारतीय साहित्य के उन प्रमुख रचनाकारों से जोड़ने के लिए तैयार की गई है, जिनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने रचे जाने के समय थीं।
5 घंटे पहले

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