हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को उनकी आत्मकथा 'अस्ति और भवति' के लिए 33वें मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडु ने कहा कि लेखक, विचारक, राष्ट्र की बौद्धिक निधि होते हैं। कोई भी राष्ट्र मात्र धनधान्य से ही नहीं समृद्ध नहीं बनता बल्कि अपने विचारों, संस्कारों से भी समृद्ध बनता है। अपने साहित्य और सृजन से भी समृद्ध होता है। साहित्य समाज में हो रहे चिंतन को दिखाता है, समाज के अनुभव का, उसकी अपेक्षाओं का दर्पण होता है। इस संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने लेखकों से अपने लेखन में भारतीय परंपरा के मूल्यों, आदर्शों और आस्थाओं को परिलक्षित करने आग्रह किया। उन्होंने साहित्यकारों से देश में नए सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सूत्रपात करने का आह्वान किया।
श्री नायडु ने कहा कि डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की आत्मकथा "अस्ति और भवति", स्वयं को ढूंढने का प्रयास है। हमारी दर्शन परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान से ही ब्रह्मज्ञान तक पहुंचा जा सकता है। आपका मानना है कि वस्तुतः आत्मज्ञान ही यथार्थ ज्ञान है।
उपराष्ट्रपति ने मूर्तिदेवी पुरस्कार के आयोजक, भारतीय ज्ञानपीठ समिति की सराहना करते हुए कहा कि मूर्तिदेवी पुरस्कार के माध्यम से भारतीय भाषाओं में हो रहे प्रयासों को सम्मानित किया जाता रहा है जिससे नई कृतियों और रचनाओं को साहित्य जगत में प्रतिष्ठा प्रदान हुई है। उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को वाग्देवी की प्रतिमा और पुरस्कार राशि का चेक प्रदान किया।
प्रो. विश्वनाथ तिवारी को यह पुरस्कार उनकी कृति 'अस्ति और भवति' के लिए दिया जा रहा है। यह पुस्तक 2014 में राष्ट्रीय पुस्तक, न्यास, दिल्ली से प्रकाशित हुई थी। प्रो. तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आचार्य और वर्ष 2013 से 2017 तक साहित्य अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष रहे हैं। मूर्तिदेवी पुरस्कार भारतीय संविधान में स्वीकृत 22 भाषाओं में से किसी एक भाषा की चयनित कृति को दिया जाता है। ‘अस्ति व भवति’ उनके 50 से अधिक वर्षों के सार्वजनिक जीवन का आईना है। इसमें उन्होंने देश की समस्याओं, संकट, विकास, राजनीतिक टकराव, लेखकों के विचार, वैश्वीकरण के दौर में बदले मूल्यों से लेकर घर-परिवार, गांव से जुड़ी स्मृतियों का जीवंत चित्रण किया है। इसके पूर्व डॉ. तिवारी को साहित्य अकादमी का महत्तर सम्मान, सरस्वती सम्मान, व्यास सम्मान, रूस का पुश्किन सम्मान, शिक्षक श्री सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन सम्मान, महादेवी वर्मा गोयनका सम्मान, भारतीय भाषा परिषद का कृति सम्मान आदि प्राप्त हो चुके हैं।
इस अवसर पर मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित श्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के अतिरिक्त भारतीय ज्ञानपीठ के प्रबंध न्यासी साहू अखिलेश जैन सहित साहित्य जगत के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
4 वर्ष पहले
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