कल नई दिल्ली प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के पहले दिन के आखिरी चरण में बत्तीस वर्षीय युवा लेखक व कवि मोहित चौहान की पुस्तक “परवाज़ - एक ज़ख़्मी पंछी" का लोकार्पण हुआ । मोहित चौहान की पुस्तक "परवाज़- एक ज़ख़्मी परिंदे की" कविताओं, नज़्मों और शायरी का एक ऐसा संग्रह है जिसमें इंसानी संवेदनाओं और विभिन्न भावनाओं का समिश्रण है। मोहित की कविताओं में जहां एक ओर प्रेम की धारा बहती है, तो दूसरी ओर दर्द का गहरा समंदर है, कभी न हारने की सीख, हर विषमता का साहस के साथ सामना करने की प्रेरणा है।
पुस्तक का विमोचन दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा किया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि मनीष सिसोदिया के अतिरिक्त हिंदी साहित्य की कुछ विशिष्ट हस्तियां, डॉ प्रेम जन्मेजई , डॉ हरीश नवल जी, डॉ संगीता शर्मा अधिकारी जी, श्रीमती सुनीता शानू जी और रणविजय राव भी उपस्थित थे।
काव्य क्षेत्र मोहित चौहान ने करीब 3 साल पहले कदम रखा और बहुत कम समय में अपनी कविताओं द्वारा लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई। मोहित "मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी" नामक घातक और लाइलाज बीमारी की जकड़ में हैं, इसके बावजूद कभी भी अपने सपनों की उड़ान को निराशा के पिंजरे में कैद नहीं होने दिया। कलम से इस बेबसी की बेड़ियों को तोड़ते हुए अपने लिए एक मुकम्मल दुनिया कायम की। एक ऐसी दुनिया जहाँ कभी न गिरने वाला मनोबल, जोश और जुनून है और जहाँ "निराशा", "नकरात्मकता" व "नामुमकिन" जैसे शब्दों का कोई स्थान नहीं है।
मोहित चौहान के जज़्बे को सलाम करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा - जैसा कि आप जानते हैं कि चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और उपमुख्यमंत्री होने के नाते मंत्रालय के प्रति मेरी कुछ ज़िम्मेदारियां हैं लेकिन जब मोहित चौहान मेरे निवास स्थान पर अपनी पुस्तक के लोकार्पण के लिए मुझे मुख्य अतिथि के रूप मे आमंत्रित करने आए तो मैं उन्हें देखकर मना नहीं कर पाया।
वास्तव में मैं उनकी आभा और शब्दों से बहुत प्रेरित हुआ। उन्होंने कहा, मोहित एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं और मैं वास्तव में इस बात से प्रेरित हूं कि पिछले 32 वर्षों से जीवन की कठिनाइयों और दैनिक संघर्षों का सामना करने के बावजूद उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प को कुछ भी हिला नहीं सका। उसने जीवन जीने के लिए चुना है। मोहित ने जब अपनी पुस्तक की एक कविता "माँ" लोगों के समक्ष पढ़ा तो कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं । अंत में मोहित ने निम्न शेर से समारोह में उपस्थित सभी को धन्यवाद दिया-
गालियों का शोर एक दिन तालियों में बदलेगा
तेरे हौसलों के आगे पत्थर क्या पर्वत भी पिघलेगा
आगे पढ़ें
6 वर्ष पहले
कमेंट
कमेंट X