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मंज़ूर हाशमी की ग़ज़ल के इस शेर के साथ वित्त मंत्री ने पेश किया था बजट 2019

budget 2019 finance minister nirmala sitharaman recites sher
                
                                                         
                            

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है*
*(इस शेर को वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान पढ़ा)

सफ़र में अब के ये तुम थे कि ख़ुश-गुमानी थी
यही लगा कि कोई साथ साथ चलता है

ग़िलाफ़-ए-गुल में कभी चाँदनी के पर्दे में
सुना है भेस बदल कर भी वो निकलता है

लिखूँ वो नाम तो काग़ज़ पे फूल खिलते हैं
करूँ ख़याल तो पैकर किसी का ढलता है

रवाँ-दवाँ है उधर ही तमाम ख़ल्क़-ए-ख़ुदा
वो ख़ुश-ख़िराम जिधर सैर को निकलता है

उम्मीद ओ यास की रुत आती जाती रहती है
मगर यक़ीन का मौसम नहीं बदलता है

6 वर्ष पहले

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