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Amar Ujala Kavya: पूरे हुए काव्य के 5 साल, पाठकों के प्रेम के साथ जारी है यात्रा

amar ujala kavya completes 5 years on 2 july 2022
                
                                                         
                            

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

ये मजरूह सुल्तानपुरी का बहुत ही मशहूर शेर है और जब अमर उजाला डिजिटल के साहित्यिक उपक्रम काव्य के 5 साल पूरे हो रहे हैं तो ये शेर इस मौके पर बहुत सटीक भी लगता है। 2 जुलाई 2017 को आगरा में हुए काव्य-महाकुंभ के साथ यह यात्रा शुरू हुई। गोपाल दास नीरज, हरि ओम पवार, संतोष आनंद, राहत इंदौरी जैसे 30 दिग्गज कवि और शायर इस मौके पर मौजूद थे। 

इन पाँच सालों में इस सफ़र का कारवाँ 30 की संख्या को पार कर चुका है। उर्दू में मीर तक़ी मीर से नए ज़माने के शायरों तक और हिंदी में सूरदास से लेकर नए तमाम कवियों तक सभी इस यात्रा के सहभागी हैं। उर्दू और हिंदी के अलावा विश्व की कई भाषाओं के कवियों व लेखकों की हिंदी में अनूदित रचनाओं को भी इसमें जगह दी गयी है। एक कोना उन क़िस्सों के लिए भी है जो इन लेखकों के जीवन में घटे। किताब समीक्षा कॉलम में किताबों पर टिप्पणी या आलोचना प्रकाशित होते हैं। हलचल जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि साहित्य जगत की जानकारी अपडेट की जाती है। सोशल मीडिया सैक्शन में वे कविताएं रहती हैं जिन्हें सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर ख़ूब पसंद किया जाता है। इसके साथ ही आज का काव्य जिसमें कविताओं, नज़्मों या ग़ज़लों का पॉडकास्ट किया जाता है। लेकिन इन सबमें सबसे ख़ास श्रेणी है ‘मेरे अल्फ़ाज़’ यानी एक ऐसी श्रेणी जो पूरी तरह पाठकों की है और ऐसे पाठक जो कविताएं भी लिखते हैं और मंच चाहते हैं। यहां वे अपनी कविताएं स्वयं ही फॉर्म भरकर सब्मिट करते हैं। टीम उन्हें संपादित करती है और वेवसाइट पर प्रकाशित करती है। अब तक इसके अंतर्गत 2 लाख से अधिक रचनाएं प्राप्त कर चुके हैं। प्रतिदिन लगभग 200 रचनाएं आज भी मिलती हैं। 

इस सफ़र के दौरान काव्य ने न सिर्फ़ शब्दों के लिखने बल्कि उनके प्रस्तुतिकरण के लिए भी मंच बनाया जिसका नाम है काव्य-कैफ़े। 5 जनवरी 2019 को यह शुरू हुआ और इस सफ़र में मंच के कई बड़े नामों से लेकर अच्छा लिखने-पढ़ने वाले तमाम युवा साथ जुड़े। नोएडा के अलावा इस कार्यक्रम को लखनऊ, सुल्तानपुर जैसे और भी शहरों में किया गया। इस कार्यक्रम में कवि और शायर आते हैं, अपनी रचना पढ़ते हैं। उनकी प्रस्तुति को रिकॉर्ड किया जाता है और काव्य के सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाता है। आज पाठकों व साहित्यिक प्रेमियों के सहयोग से काव्य के फेसबुक पर लगभग 2,43,000 इंस्टाग्राम पर 33,600 और ट्विटर पर 77,600 फॉलोवर हैं। कुल मिलाकर 3,54,200 लोग काव्य के सोशल मीडिया पर किसी परिवार की तरह जुड़े हैं। शेर, कविताएं आदि पढ़ते हैं और अपनी प्रतिक्रिया वहां देते हैं। 

वेबसाइट पर आज का शब्द और आज का विचार भी शुरु किया। आज का शब्द के अंतर्गत प्रतिदिन हिंदी शब्दकोश से एक शब्द उसके अर्थ सहित पेश किया जाता है, साथ ही उससे संबंधित कविता भी जिसमें वह शब्द प्रयोग हुआ हो। लगभग दो साल पहले शुरु हुई इस पहल में अब तक 686 शब्दों को प्रयोग कर चुके हैं। 

काव्य की इस साहित्यिक यात्रा में जुड़ने व इसे अनवरत प्रेम देने के लिए सभी पाठकों का शुक्रिया। 
4 वर्ष पहले

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