एक जमाने में रेडियो ही क्रिकेट कमेंटरी सुनने का एकमात्र जरिया था। उस दौर की कुछ आवाजें आज भी सुनाई देती हैं, जब हर किसी के पास डिजिटल माध्यम से कमेंटरी उपलब्ध है। उन्हीं आवाज़ों में से एक हैं सुशील दोशी । इन दिनों उनकी एक किताब की चर्चा खूब है। पुस्तक है- 'आंखों देखा हाल'। सुशील दोशी के संस्मरणों का संकलन है। इसमें उन्होंने अपने पांच दशकों की क्रिकेट कमेंटरी के अनुभवों को दर्ज किया है। पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महा आर्यमन सिंधिया ने किया।
सुशील दोशी को हिंदी क्रिकेट कमेंटरी का जनक माना जाता है। क्रिकेट कमेंटरी में उनके योगदान को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें 'लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार' और भारत सरकार ने 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। वह देश के पहले ऐसे कमेंटेटर हैं, जिनके नाम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के कमेंटरी बॉक्स का नाम रखा गया है। सुशील दोशी ने करीब 600 अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिंदी कमेंटरी की है। उन्होंने कई देशों और कई चैनलों पर हिंदी कमेंटरी की है। पिछले पांच दशक से वे ऐसा करते आ रहे हैं।
2 वर्ष पहले
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