दादी नानी से सुनी कहानियां रविवार शाम फिर जिन्दा हो गयीं । ऑक्टेव फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'वारी जलसा' में जब अलग अलग किस्सागो ने कहानियां सुनाईं तो सभागार में उपस्थित सभी दर्शक अपने बचपन की खिड़कियों में झांकने लगे। 'वारी' एक मणिपुरी शब्द है जिसका अर्थ है "कहानी"।
दिल्ली के इंडियन हैबिटेट सेंटर के स्टेन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में केरल, तमिलनाडु , मणिपुर और कर्नाटक की लोक कथाओं को मौजूदा हालात से जोड़कर पेश किया गया। तमिलनाडु की लोक कथा "भाग्य से टक्कर" को हिमांशु सिंह और वेलेंटिना त्रिवेदी ने प्रस्तुत किया। इस कहानी में बड़े ही रोचक ढंग से बताया गया कि कैसे अपनी बुद्धि के बल पर आदिकर्ता नामक ऋषि ने ब्रह्मा जी और उनके लिखे भाग्य से टक्कर ले ली थी।
वहीं केरल की कहानी "नीलकंठ" में माधवी मेनन ने कूडियाट्टम नामक लोक शैली के माध्यम से नीलकंठ नामक हाथी और उसके प्रेम को दर्शाया। प्राचीन संस्कृत नाटकों का नाट्य रूप कूडियाट्टम कहलाता है। दो हज़ार वर्ष पुराने कूडियाट्टम को युनेस्को ने 'वैश्विक पुरातन कला' के रूप में स्वीकार किया है।
ऑक्टेव फाउंडेशन की संचालिका निकी चंदम ने बताया कि उनकी टीम समय समय पर स्टोरी टेलिंग के कार्यक्रम आयोजित कर कहानी सुनाने की कला को दोबारा जिन्दा करना चाहती है। जहां एकल परिवार और व्यस्त जीवनचर्या के चलते माँ -बाप और परिजन व्यस्त रहने लगे हैं ऐसे में बच्चों के सामने मनोरंजन का साधन मोबाइल फोन बना दिया जाता है। ऐसे में बच्चे कहानियों से दूर होते जा रहे हैं और मोबाइल स्क्रीन के पास आते जा रहे हैं।
दर्शकों ने जमकर इन मजेदार कहनियों का लुत्फ़ लिया और यह वायदा भी किया कि वे इन कहानियों को औरों तक ले जायेंगे।
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