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किताब समीक्षा: खजुराहो के संसार और जिंदगी का लेखा-जोखा रचता उपन्यास "लपका"

खजुराहो
                
                                                         
                            
खजुराहो को बरसो से देखते आ रहा हूं और हर बार जाता हूं तो लगता है कितना बदल गया यह कस्बा। बीएड कर रहे थे सतना से 1992-93 की बात होगी। तुलनात्मक रूप से युवा थे हम सब। ग्रामोदय विवि चित्रकूट से बस में भरकर गए थे। देशभर के जवान लड़के-लड़कियां और मन्दिर के दृश्य, लड़कियां तब आज की तरह नहीं थी।

चुन्नी में मुंह छुपाती और डर- डरकर मन्दिर देख रही थी और कुछ ने तो कसम खाई कि अब इस जन्म में तो नही आयेंगी यह गंदा गंदा देखने और "कभी हनीमून पर पति ले आया तो" मैंने पूछा तो लाल मुंह कर शर्मा कर भाग गई बाहर के बड़े से फैले बगीचे में और हम लडके कनखियों से उन्हें देखते और सोचते कि काश ग्रामोदय विवि आज हमें रात यही रुकने की इजाजत देदें, पर अफसोस .....

खजुराहो को हर आदमी अपने नजरिये से देखता है। हम जब मंदिरों में दीवारों पर उत्तेजक सीन देख रहें थे। मूर्तियों को मैथुनरत देख रहें थे। वात्सयायन के आसन समझ रहें थे तो कलेजे पर सांप लौट रहे थे।

उस जमाने में 90 रुपये का रोल डलवाकर कैनन के कैमरे से फोटो खींच रहें थे तब हमारा एक साथी और मेरे बचपन का दोस्त संजय जोशी मतंगेश्वर के मंदिर से सिर पर शिव का टीका लगाकर निकला था और विनीता ने कहा कि "भाभी ने अश्लील मूर्तियां देखने को मना किया क्या जोशी जी", पर बाद में समझ आया कि जब तक सेक्स से तृप्ति नहीं मिलेगी तब तक परमात्मा तक नहीं पहुंच पाओगे और यही लिखकर ओशो की किताब "सम्भोग से समाधि" आज विश्व के सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में शुमार है।  

मेरा एक छात्र वहां पर तहसीलदार रहा और बाद में एक छात्र व्यवहार न्यायाधीश वर्ग - 2 रहा तो जब भी पन्ना - छतरपुर जाता और उन्हें मालूम पड़ता तो वह बमीठा के रास्ते सरकारी गाड़ी भेज कर मुझे खजुराहो बुलवा लेते या तो तालाब वाले रोड पर अपने बंगलों में रुकवाते या फिर किसी होटल में रुकवा देते। बुंदेला पैलेस हो या सिद्धांत होटल हो - ये मेरी फेवरेट जगह रही है।

लंबे समय बाद मेहरून वहां पर हमारी दोस्त रही - जो किशोरावस्था की लड़कियों के साथ अभी भी अच्छा काम कर रही है। बीच में लड़कियों के खरीद-फरोख्त की बात थी या विमेन ट्रैफिकिंग का मुद्दा, जब वहां के सारे गुंडे मवाली हम लोगों के खिलाफ हो गए थे। यहां तक कि पुलिस वाले भी हमें समझाने लगे थे कि आप इनके मुंह मत लगो, तो मेहरून ने बड़ी दबंगता के साथ उन सब से निपटारा किया और आज दमखम के साथ अपना काम कर रही है।
 
खजुराहो को सेक्स, धर्म, अध्यात्म और टूरिज्म के हिसाब से देखना अर्थात् अलग-अलग नजरियों से अलग-अलग रूप में देखना है। असल में ओरछा, झांसी, टीकमगढ़, तालबेहट, बबीना, ललितपुर, छतरपुर, पन्ना ये सब जगहें बहुत छोटी-छोटी दूरी पर स्थित है और हर जगह पर इतिहास, जंगल, नदी, मंदिर, किले, कहानियां और भले बुरे लोग मौजूद हैं - पन्ना जहां मंदिरों का नगर है एवं धामी समुदाय के लोगों का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। वही ओरछा रामराजा  का नगर है, तालबेहट  -  बबीना फौजियों का अड्डा है और झांसी तो खैर किले का शहर है ही, पास ही ग्वालियर और चंबल के अन्य नगर हैं। 
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3 वर्ष पहले

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