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जनता स्टोर - नए युवा की नई जुबान

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राजनीति में संबंध किस तरह बदलते हैं और कौन, कहां, किसके साथ खड़ा है यह पता करना कितना मुश्किल होता है, इसका सामना पाठक पुस्तक के माध्यम से करता है।

दुनिया एक बाजार है तो इस बाजार में हम सब अपनी-अपनी नैतिकताओं के साथ कभी अकेले, तो कभी भीड़ में खड़े हैं। बाजार ही हमें परखता है। बाजार ही हमें खरे और खोटे का प्रमाणपत्र देता है। बाजार ही हमें ब्रांड बनाता है और बाजार ही हमें बाहर का रास्ता दिखाता है। इसी बाजार में हमारी पढ़ाई है, हमारे संस्थान हैं, हमारे सपने हैं और हमारी राजनीति है। इसी बाजार की तमाम परतों को सामने लाती है ‘जनता स्टोर’। किताब से गुजरते हुए कभी लगता है कि हम सब किसी न किसी तरह की राजनीति से घिरे हैं, तो कभी लगता है कि तमाम अवमूल्यन के बावजूद दोस्ती की ऊष्मा बची हुई है।

इस किताब की कहानी में चार दोस्त हैं, जो यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। चार दोस्तों का यह ग्रुप कैसे एक अनचाही लड़ाई के बाद यूनिवर्सिटी के सीनियर छात्र नेताओं के संपर्क में आता है और फिर किस तरह इन युवाओं की सोच बदलती है, घटनाएं बदलती हैं और कुछ सच भी बदलते हैं, इसे जानना दिलचस्प है।

राजनीति में संबंध किस तरह परत-दर-परत बदलते हैं और कौन, कहां, किसके साथ खड़ा है यह पता कर पाना कितना मुश्किल होता है, इसका सामना पाठक जनता स्टोर में करते हैं। इसके अलावा भारतीय राजनीति को जातीय राजनीति ने कैसे प्रभावित किया है, इसकी बड़ी बारीक पड़ताल हुई है।

बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साजिशें, हत्याएं, बलात्कार- ये सब कहानी को नया मोड़ देते हैं। इस किताब की पृष्ठभूमि राजस्थान की रखी गई है। पृष्ठभूमि राजस्थान चुनने के पीछे कारण यह हो सकता है कि लेखक खुद राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और स्टूडेंट यूनियन का चुनाव लड़ चुके हैं। लेखक अपने किताब के शीर्षक पर कहते हैं-“ हमारे मोहल्ले में ऐसी दुकान होती है, जहां आप किसी भी समय आंख मूंदकर पहुंच सकते हैं।

जनता स्टोर हम सब की जिंदगी का एक हिस्सा है। जनता स्टोर जैसी दुकानें मुहल्ले के लोगों के खड़े होकर गपशप करने का अड्डा भी होती हैं, जहां लोग देश-दुनिया बदलने की पूरी प्लानिंग कर लेते हैं। फिर राशन लेकर अपने घर आ जाते हैं और जनता स्टोर ऐसा ही एक अड्डा है, जहां पर छात्र विश्वविद्यालय से लेकर अमेरिका तक की राजनीति, प्रोफेसर से लेकर चपरासी तक की प्रेम कहानी की चर्चा करते हैं और फिर चाय पानी करके वापस आ जाते हैं।” वैसे, किताब नए युवा की नई जुबान में आपके सामने होती है और आप उत्तर भारत के किसी भी विश्वविद्यालय से पढ़े हों इस कहानी के पात्र आपकी क्लास के ही लगेंगे।


किताब- जनता स्टोर
लेखक- नवीन चौधरी
प्रकाशक- राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य- 199 रुपये



मनोरंजन फ़ीचर पेज से साभार

7 वर्ष पहले

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