आशुतोष टीवी पत्रकारिता का केवल जाना-माना चेहरा ही नहीं रहे हैं, पत्रकारिता से राजनीति और राजनीति से पत्रकारिता में वापस लौटने के अपने फैसले के कारण भी वह चर्चा में रहे हैं। उनकी यह किताब नरेंद्र मोदी की सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान जीवन के विविध क्षेत्रों में आए बदलाव पर है। मुस्लिम, दलित, इतिहास से सुलूक, कश्मीर, राष्ट्रवाद और आतंकवाद की बारीक रेखा, विपक्ष, न्यायपालिका और मीडिया जैसे अलग-अलग विषयों की यहां उन्होंने बेहद गंभीर पड़ताल की है। गोरक्षा पर लिखते हुए आशुतोष वर्गीज कुरियन के एक महत्वपूर्ण खुलासे का जिक्र करते हैं। नवंबर, 1966 में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए हजारों साधु-संतों ने जब संसद को घेर लिया था, तब पुलिस की गोलीबारी में कुछ आंदोलनकारी हताहत हुए थे। इंदिरा गांधी ने एक कमेटी गठित की थी, जिसमें संघ के तत्कालीन सरसंघचालक गोलवलकर और दुग्ध क्रांति के जनक कुरियन थे।
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X