आज के तेजी से बदलते कारोबारी माहौल में सही निर्णय लेना हमेशा आसान नहीं होता है। अप्रत्याशित चुनौतियाँ, ग्राहकों की बदलती जरूरतें और छिपी हुई समस्याएं सबसे अच्छी तरह से बनाई गई रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकती हैं। पुस्तक 'काउंटर थिंक: योर वे टू ए सक्सेसफुल बिजनेस' (Counter Think: Your Way To A Successful Business) यह गहराई से टटोलती है कि कैसे स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली चीज़ों से परे देखना लोगों को बेहतर निर्णय लेने और चुनौतियों के सामने आने से पहले ही उनके लिए तैयार रहने में मदद कर सकता है?
भगवद्गीता के श्लोक 4.18 से प्रेरित होकर, जो "कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म" देखने की बात कहता है, यह पुस्तक प्राचीन ज्ञान को आधुनिक व्यावसायिक प्रथाओं के साथ जोड़ती है। यह बताती है कि कैसे कठिन परिस्थितियों में शांत रहना, मान्यताओं पर सवाल उठाना और विभिन्न दृष्टिकोणों से समस्याओं को देखना बेहतर परिणाम दे सकता है।
पुस्तक का मुख्य विचार "काउंटर थिंक" (Counter Think) है, जो पाठकों को किसी भी बात को उसकी ऊपरी कीमत पर स्वीकार करने के बजाय अलग तरीके से सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है। पुस्तक इस बात के महत्व पर भी प्रकाश डालती है कि जो सच माना जा रहा है उसके विपरीत पर विचार किया जाए और जब तुरंत कोई समाधान न मिले तो धैर्य रखा जाए।
यह पुस्तक तीन भागों में बंटी है। इसकी शुरुआत 'बैटल ऑफ ब्रिटेन' (Battle of Britain) से होती है, जिसमें यह दिखाया गया है कि कैसे छिपी हुई चुनौतियों की अनदेखी करने से असफलता मिल सकती है। दूसरा भाग ऑटोमोबाइल उद्योग के मामलों के माध्यम से 12 काउंटर थॉट नियम प्रस्तुत करता है। वहीं, तीसरे भाग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की वास्तविक जीवन की स्थितियों पर आधारित 15 काल्पनिक मामले शामिल हैं।
कुल मिलाकर, 'काउंटर थिंक' प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक प्रबंधन चुनौतियों के साथ जोड़कर व्यावसायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर एक उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह उद्यमियों, बिजनेस लीडर्स, प्रबंधकों और प्रबंधन छात्रों के लिए एक पढ़ने योग्य पुस्तक है जो मान्यताओं पर सवाल उठाना चाहते हैं, छिपे हुए जोखिमों की पहचान करना चाहते हैं और अधिक सोच-समझकर निर्णय लेना चाहते हैं।
लेखकों के बारे में:
इस पुस्तक के तीन लेखकों में से, शिलादित्य दासगुप्ता एक कॉस्ट अकाउंटेंट हैं और उन्होंने BITS पिलानी से पीएचडी की है, जिन्हें उद्योग और शिक्षण का 32 वर्षों का अनुभव है। दूसरी लेखिका डॉ. डिंपल भराली एक अकादमिक, शोधकर्ता, समीक्षक और शिक्षिका हैं जिनके नाम 20 शोध प्रकाशन और एक पुस्तक दर्ज है। इसके अलावा, अमित कुमार श्रीवास्तव के पास BFSI, फिनटेक, मीडिया और एआई-संचालित उत्पादों में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिनका मुख्य फोकस ऐसे समाधान तैयार करना है जो सार्थक व्यावसायिक प्रभाव पैदा करें।
3 घंटे पहले
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