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21वीं सदी के लिए 21 सबक - क्या हम खुद को जान पाए हैं

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भविष्य की दुनिया कैसी होगी, इसका स्वरूप क्या होगा, मनुष्य की इसमें क्या भूमिका होगी, ये सवाल नए नहीं हैं। लंबे समय से मनुष्य का अवचेतन ऐसी चुनौतियों से दो-चार होता रहा है। युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखी किताब '21वीं सदी के लिए 21 सबक' इसी विषय पर उठने वाले कुछ दिलचस्प सवालों के जवाब तलाश करती है। युवाल नोआ हरारी पहले भी ऐसी किताबें लिख चुके हैं।

उनकी दो पुस्तकें 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ ह्यूमनकाइंड' और 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टुमारो' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुकी हैं। अब उन्होंने मनुष्यता और सृष्टि के छिपे हुए रहस्यों को एक व्यापक समयावधि में देखने की चेष्टा की है। भूतकाल और दूरस्थ भविष्य के बारे में हमारे आकलन वर्तमान के लिए कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं और उनको आधार बनाकर मानव समाज की तात्कालिक दुविधाओं का समाधान किस स्तर तक निकाला जा सकता है, इसका मर्म समझने की चेष्टा उनके लेखन में नजर आती है। युवाल कुछ अन्य ज्वलंत मुद्दों से भी रूबरू होते हैं।

दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं और उनसे निपटने के लिए हमारे पास विकल्प क्या हैं, हमें किस चीज पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए? हमें अपने बच्चों को क्या पढ़ाना चाहिए? इन सब सवालों के जवाब तलाश करने की कोशिश की गई है। जो लोग जीवन-मृत्यु के आधारभूत संकटों में फंसे हैं, जलवायु परिवर्तन उनके सरोकारों से बहुत दूर की चीज हो सकती है। लेकिन यही बात कुछ सालों के बाद उन्हें अंततः असुरक्षित बना सकती है। प्रकृति के संतुलन में थोड़ी-सी तब्दीली शरणार्थियों की विशाल लहर पैदा कर सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विश्वव्यापी संकट का कारण बन सकती है। वास्तविकता को समग्र रूप से देखना बहुत जरूरी है।

यह पुस्तक दुनिया पर मंडराते खतरों के विभित्र पक्षों को समेटने की कोशिश करती है। इसके पांच खंडों में प्रौद्योगिकीय और राजनीतिक चुनौतियों, हताशा और उम्मीदों, जमीनी सच्चाइयों और हकीकत को अलग-अलग वर्णित किया गया है। आज उदारवाद अपनी विश्वसनीयता खो रहा है, सूचना और जैव प्रौद्योगिकी की क्रांतियां हमारे सामने बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं, ऐसे में इन आसन्न खतरों के बारे में जनसामान्य के पास पर्याप्त जानकारी होनी आवश्यक है। युवाल नोआ हरारी हमें वर्तमान के कुछ अति महत्वपूर्ण मुद्दों की रोमांचक यात्रा पर ले जाते हैं।

किताब- 21वीं सदी के लिए 21 सबक
लेखक- युवाल नोआ हरारी
प्रकाशक - मंजुल पब्लिशिंग हाउस, भोपाल
मूल्य- 399 रुपये
6 वर्ष पहले

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