भविष्य की दुनिया कैसी होगी, इसका स्वरूप क्या होगा, मनुष्य की इसमें क्या भूमिका होगी, ये सवाल नए नहीं हैं। लंबे समय से मनुष्य का अवचेतन ऐसी चुनौतियों से दो-चार होता रहा है। युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखी किताब '21वीं सदी के लिए 21 सबक' इसी विषय पर उठने वाले कुछ दिलचस्प सवालों के जवाब तलाश करती है। युवाल नोआ हरारी पहले भी ऐसी किताबें लिख चुके हैं।
उनकी दो पुस्तकें 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ ह्यूमनकाइंड' और 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टुमारो' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुकी हैं। अब उन्होंने मनुष्यता और सृष्टि के छिपे हुए रहस्यों को एक व्यापक समयावधि में देखने की चेष्टा की है। भूतकाल और दूरस्थ भविष्य के बारे में हमारे आकलन वर्तमान के लिए कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं और उनको आधार बनाकर मानव समाज की तात्कालिक दुविधाओं का समाधान किस स्तर तक निकाला जा सकता है, इसका मर्म समझने की चेष्टा उनके लेखन में नजर आती है। युवाल कुछ अन्य ज्वलंत मुद्दों से भी रूबरू होते हैं।
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