इस कोरोना काल ने देश के बहुत से छुपे प्रतिभाशाली चेहरों को सामने लाया, जो समाज के लिए कुछ बेहतर प्रयास करने में जुटे हुए हैं। कोरोना कहर के डर से आज लोग अपने अपने घरों में रहने पर मजबूर हो गए हैं ऐसे में तमाम लोग अपने अपने तरीके से घर पर जीने की कला सीख रहे हैं। बंद कमरे में भी रहकर लोग अपने अंदर की कला को फूट-फूट कर बाहर निकाल रहे हैं कोई कहानी लिख रहा है तो कोई कविताएं।
उनमें से युवा लेखक अंशुमन भगत हैं। जो अपने लेखन के माध्यम से लोगों में अच्छे सुविचार तथा सकारात्मकता जैसी भावनाओं का गान करवाते हैं। जिससे सभी क्षेत्र के लोगों के लिए और खास तौर पर आज की युवा पीढ़ी के लिए काफी मददगार होता है।
उनकी किताब "योर ओन थॉट" को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय रघुवर दास जी से भी सराहना मिल चुकी है। उनका कहना है कि अंशुमन द्वारा लिखी गई किताब से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक भाव के साथ अपने जीवन को एक नया रूप दे सकता है यह एक सार्थक प्रयास है की इस किताब के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
"योर ऑन थॉट" जिसका अर्थ है "आपकी खुद की सोच" जो आप अपने मन से सोचते हैं, आजकल की इस भागदौड़ भरे जीवन में लोग अपने अंदर की भावनाओं को ना समझ कर कैसे उन तक पहुंचा जाए यह सब एक स्पर्धा के रूप में समझते हैं। जबकि उसके अंदर भी वही शक्ति है जो सभी लोगों में वह है "सोच" आपकी खुद की सोच।
अंशुमन भगत ने इतनी कम उम्र में ही ऐसे विषयों पर पुस्तक लिखे हैं जो कि हर युवा वर्ग को प्रोत्साहित करता है और कुछ नया करने पर विवश करता है उनकी पुस्तक भारत के हर प्लेटफार्म पर अवेलेबल है।
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5 वर्ष पहले
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