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नेपाल में बाढ़ के बाद आया 5.2 की तीव्रता का भूकंप , अब तक 150+ लोगों की मौत!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Thu, 27 Aug 2026 02:31 AM IST

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 157 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास स्थित इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। 

इसी बीच बुधवार को क्षेत्र में 5.2 तीव्रता के कंपन की खबर सामने आई, जिससे शुरुआत में यह आशंका जताई गई कि भूकंप ने इस प्राकृतिक आपदा को जन्म दिया होगा। लेकिन बाद में अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण यानी USGS ने स्पष्ट किया कि यह कंपन किसी भूकंप के कारण नहीं था। USGS के अनुसार शुरुआत में 4.4 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया गया कंपन वास्तव में एक बेहद शक्तिशाली भूस्खलन से उत्पन्न हुआ था, जिसकी ऊर्जा 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर दर्ज की गई। 

प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े पैमाने पर नीचे गिरने से नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ और इसके बाद अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। इस फ्लैश फ्लड ने भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। हालांकि, इस घटना के पूरे क्रम और इसके सटीक कारणों की जांच अभी जारी है। 

इस आपदा का असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक चीन के क्षेत्र में भी लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है तथा सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

शुरुआती जानकारी में आशंका जताई गई थी कि भूकंपीय गतिविधि के कारण ग्लेशियर या बड़े भूस्खलन से नदी का प्रवाह बाधित हुआ और उसके बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। हालांकि, वैज्ञानिक जांच में यह भी संभावना सामने आई है कि दर्ज किया गया कंपन स्वयं बड़े भूस्खलन या ग्लेशियर टूटने की प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है, इसलिए भूकंप को बाढ़ का निश्चित कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। 
 रसुवा और आसपास के इलाकों में बाढ़ ने सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में क्षतिग्रस्त सड़कों और संपर्क व्यवस्था के कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। 
 

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