रुद्रपुर के इंकलाबी मजदूर केंद्र के सेमीनार में चार श्रम संहिताओं का विरोध किया गया। श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की है। नगर के आहूजा धर्मशाला में हुए सेमीनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट ने कहा कि 44 श्रम कानूनों के स्थान पर केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिता (लेबर कोड) को लागू किया है। श्रम संहिताओं के माध्यम से मजदूरों के संगठित होने के अधिकार पर हमला किया गया है। स्थायी रोजगार पाने के अधिकार को छीना गया है। वक्ताओं ने कहा कि आठ घंटे के कार्य दिवस का कानूनी अधिकार को छीनने, यूनियन बनाने और हड़ताल करने के सांविधानिक अधिकार से भी किया जा रहा है। तालाबंदी की पूंजीपतियों को खुली छूट देने, महिला मजदूरों से रात की पाली और खतरनाक उद्योगों में काम कराने, कर्मचारी राज्य बीमा आयोग, कर्मचारी भविष्य निधि की सामाजिक सुरक्षा छीनने की साजिश की गई है। पुराने श्रम कानूनों में प्रदत्त अधिकारों को मजदूरों से छीन लिया गया है।