काशीपुर की जीवनदायनी बहला नदी में अब जहर घुलकर बह रहा है। यह फैक्टरियों से आने वाले केमिकल युक्त पानी से दूषित होकर अपना अस्तित्व तक खो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी की चपेट में आकर नदी किनारे बसे गांव के कई लोग पेट रोग, पीलिया, कैंसर की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। रामनगर हाईवे स्थित ग्राम प्रतापपुर क्षेत्र से बहला नदी काशीपुर के मालवा फार्म, कुआंखेड़ा, हिम्मतपुर, चनकपुर, बरखेड़ी, लोहिया पुल होते हुए यूपी को निकलती है। यूपी के समय इस नदी स्वच्छ थी, इसके पानी से सिंचाई होती थी। ग्रामीण पशुओं को इसी नदी के पानी को पिलाते थे। उत्तराखंड बनने के बाद पेपर-गत्ता मिल और अन्य कई फैक्टरियां स्थापित हो चुकी हैं। साथ ही आबादी का गंदा पानी भी इसी नदी में छोड़ा जा रहा है। इस पानी की दुर्गंध से ग्रामीणों की जीना मुहाल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्टरियों के केमिकल युक्त दूषित पानी छोड़ने से जीवनदायनी नदी अपना अस्तित्व खो चुकी है। अब इसे गंदे नाले के रूप में जानते हैं। इसका पानी जमीन के अंदर 50 फुट नीचे के पानी को प्रदूषित कर चुका है। इसके सेवन से ग्रामीण जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कुछ ग्रामीण अस्पताल में कैंसर से जद्दोजहद कर रहे हैं।