देवप्रयाग में, गंगा और अलकनंदा के पवित्र संगम पर, अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहां लोगों ने अपने दिवंगत पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए विशेष तर्पण किया। यह दृश्य आस्था, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है। सनातन धर्म में, अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा और अलकनंदा के संगम पर तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुबह से ही घाट पर भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मंत्रोच्चार के साथ जल अर्पित कर अपने पूर्वजों को नमन किया। कई लोगों ने ब्राह्मणों को भोजन और दान भी दिया।