अतिवृष्टि के कारण हिमालय के ऊंचाई वाले बुग्याल क्षेत्रों में भू–क्षरण के साथ जगह छोटे-छोटे नाले बन जाते हैं। वहीं कई स्थानों पर भूस्खलन और मिट्टी कटाव के कारण जमीन धंसाव से ये नाले कारण बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाते हैं। इससे न केवल बुग्यालों की समृद्ध घास को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इन पर्वतीय घास के मैदानों की प्राकृतिक सुंदरता और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस लगातार बढ़ते नुकसान को देखते हुए वन विभाग बुग्याल संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए कार्य कर रहा है। इसी के तहत पंवाली कांठा क्षेत्र में 1000 वर्गमीटर बुग्याली क्षेत्र का ट्रीटमेंट किया गया है।