रुड़की। करीब दो दशक पहले ट्रेनों के मुसाफिरों को बेहतर रेल सुविधा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2006 में झबरेड़ा में रेलवे स्टेशन निर्माण की घोषणा की थी। लंबे इंतजार और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद स्टेशन का निर्माण तो लगभग पूरा हो गया, लेकिन आज भी यहां से यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। हालत यह है कि पिछले एक वर्ष से स्टेशन पर केवल एक-दो मालगाड़ियां ही गुजरती दिखाई देती हैं, जबकि यात्री ट्रेन के इंतजार में स्थानीय लोग मायूस है। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन बनने से उन्हें दिल्ली, देवबंद, सहारनपुर, रुड़की, देहरादून और हरिद्वार आदि स्टेशनों तक आने-जाने में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद थी लेकिन अब तक कोई यात्री ट्रेन नहीं चलने से स्टेशन केवल शोपीस बनकर रह गया है। स्टेशन परिसर में कई कार्य अभी भी अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों में रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय निवासी राजकुमार सैनी ने कहा कि सरकार ने स्टेशन बनाकर लोगों को उम्मीद तो दी, लेकिन यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू न होने से क्षेत्रवासियों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। रोजाना सफर करने वाले लोगों को आज भी दूसरे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं व्यापारी नेता नफीस अहमद ने बताया कि यदि झबरेड़ा स्टेशन से यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाए तो व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे को जल्द इस ओर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। अब तक काम नहीं हो पाया पूरा सरकार ने झबरेड़ा रेलवे स्टेशन के तैयार होने का जमकर ढिंढोरा पीटा था लेकिन पड़ताल में दावे खोखले साबित हो गए। वर्तमान में स्टेशन की स्थिति अभी ठीक नहीं है। प्याऊ लगे हैं लेकिन उनसे पानी नहीं आ रहा है। शौचालय की अंदर की स्थिति क्या है फिलहाल यह कहना भी संभव नहीं है क्योंकि बाहर ताले लटके हैं। अभी वहां पर टाइल लगाने का काम भी चल रहा है। यात्री के बैठने की सीट भी टूटी है। स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। साफ-सफाई और रखरखाव में लापरवाही बरतने से स्टेशन के मुख्य द्वार पर भी काफी झाड़ियां और अन्य समस्या है। मेन रोड से 1 किलोमीटर दूर है स्टेशन झबरेड़ा में किसान चौक के पास मंगलौर रोड है। वहां अंडरपास से पहले करीब 20 फुट का रोड रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा है। मेन रास्ते से रेलवे स्टेशन की दूरी करीब 1 किलोमीटर है। वहां कोई पथ प्रकाश और सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। मेन सड़क से रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा मार्ग असुरक्षित है। रोड के दोनों किनारों पर खेत है। गन्ने की फसल तैयार होने पर यात्री सुरक्षा को लेकर भी की चिंता बढ़नी तय है क्योंकि कोई भी बदमाश यात्रियों से लूट की वारदात को अंजाम देकर खेतों के रास्ते फरार हो सकता है। रुड़की-देवबंद रेल मार्ग की मुख्य विशेषता जाने देवबंद-रुड़की नई रेलवे लाइन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच की दूरी को कम करने के लिए चालू की गई है। इस रूट के चालू होने से दिल्ली और देहरादून-हरिद्वार के बीच की दूरी लगभग 33 किलोमीटर कम हो गई है। दावा है कि यात्रियों का करीब 1 से 1.5 घंटे का समय बचा है। इस 29 किमी लंबे ट्रैक पर दो नए स्टेशन - बन्हेड़ा खास (यूपी) और झबरेड़ा (यूके) में बनाए गए हैं। पहले दिल्ली से हरिद्वार-देहरादून जाने वाली ट्रेनों को सहारनपुर के टपरी स्टेशन से घूमकर जाना पड़ता था, जो काफी लंबा रास्ता था। अब इस शॉर्टकट रूट से सफर काफी सुगम हो जाएगा।