बैकुंठ चतुर्दशी मेला में कलाकारों ने गैंडा वध नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। इससे पहले लोकगायक अमित सागर की प्रस्तुति ने मेले की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। गायक शाश्वत पंडित, अमित खरे, वसुधा गौतम ने भी अपने गीतों से समा बांध दिया। शनिवार को बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी की तीसरी सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद्र अग्रवाल ने किया था। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने से पहले कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव के दर्शन किए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका रही व इसे संवारने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। उन्होंने मेले में लगी प्रदर्शनियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रदर्शनियां स्थानीय उत्पादों को बेहतर मंच उपलब्ध करवाती हैं। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया। इसके उपरांत लोक गायक अमित सांगर ने अपने गीतों से समा बांध दिया। अमित सागर के चैता की चैत्वाली, सुवा तेरी यादों मां, राम जी ने सीता जपी, घुंघरू बजा दे छमा-छम आदि गीतों पर दर्शक खूब झूमे। इसके अलावा लोक गायक अमित खरे ने सर्ग तारा, भामा तेरी, गायिका वसुधा गौतम ने मेरा दयोरा मोहना गीतों की प्रस्तुति दी। देर रात तक दर्शक पांडाल में गायकों के गीतों पर थिरकते रहे।