बलियानाला क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान बीडी पाटनी ने कहा कि जल्द से जल्द ट्रीटमेंट कार्य होना पहाड़ी के लिए जरूरी है। हांलाकि बीते कुछ महीनों से पहाड़ी में कोई दरार या कोई हलचल नहीं है। लेकिन बरसात से पहले लगभग 50 मीटर ढलान की ओर जाना पड़ेगा। अन्यथा बरसात में पहाड़ी पर भूकटाव जैसी समस्याएं आ सकती हैं। नैनीताल के बलियालाला क्षेत्र में हो रहे ट्रीटमेंट कार्य का भूवैज्ञानिक बीडी पाटनी ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाटनी ने सिंचाई विभाग की टीम के साथ बलियानाला की तलहटी का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बरसात से पहले तलहटी में 50 मीटर नीचे तक कार्य करने की बात कही। भूवैज्ञानिक बीडी पाटनी ने बताया कि भूस्खलन क्षेत्र को बचाने व मजबूती के प्रदान करने के लिए भूस्खलन क्षेत्र को मौनोलिथिक बनाने के साथ ग्राउटिंग की जा रही है, ताकि पहाड़ी को मजबूती प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा इस तकनीक के माध्यम से दोबारा भूस्खलन होने की संभावना न के बराबर होती है। बलियानाला का कार्य डीपीआर के अंर्तगत ही कार्य किया जा रहा है। बलियानाला में ट्रीटमेंट का कार्य बेहतर किया गया है। ट्रीटमेंट कार्य नई वैज्ञानिक तकनीक से किया जा रहा है। बताया कि दो साल में पहाड़ी का ट्रीटमेंट कार्य पूरा किया जाना है। इसी तरह कार्य चलता रहा तो पहाड़ी सुरक्षित रहेगी। लेकिन ढलान में बरसात से पहले लगभग 50 मीटर तक ट्रीटमेंट कार्य करना होगा। वरना पहाड़ी की तलहटी में बरसात के दौरान भू- कटाव हो सकता है।