फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Champawat: आरएएस बदलेगा मत्स्य पालकों की तकदीर, जानिये कैसे?

हीरा मेहरा Updated Sat, 21 Jun 2025 02:03 PM IST

भाकृअनुप-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय और प्रायोगिक मत्स्य प्रक्षेत्र छीड़ापानी में देश के पहले स्टेट ऑफ द आर्ट रेनबो ट्राउट मछली रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) का निर्माण शुरू हो गया है। आरएएस की मदद से एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इस सिस्टम के बनने से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत होगी और मत्स्य पालन की लागत कम होने से पालकों को काफी मुनाफा होगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.64 करोड़ की लागत से आरएएस का निर्माण किया जा रहा है। आरएएस का निर्माण होने के बाद एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इससे प्रतिदिन करीब सात लाख लीटर पानी की बचत से जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। आरएएस से रेनबो ट्राउट के सफल उत्पादन के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी रेनबो ट्राउट मछली के उत्पादन की अलग-अलग आरएएस इकाई स्थापित की जाएंगी।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें