चंपावत नगर के स्व. दीवान सिंह लडवाल खेल मैदान में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कलश संगीत कला समिति ने खड़ी होली महोत्सव (चौबे होली) का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि खड़ी होली उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत, लोकसंगीत और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। राज्य सरकार लोककला एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता पर समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परम्पराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 1980 के दशक तक चौबे होली पूरे उत्कर्ष पर थी। होली के जानकार भगवत प्रसाद का कहना है कि चौबे होली में शराब के बढ़ते प्रचलन के साथ ही संस्कृति विभाग की उदासीनता से प्रोत्साहन न मिलने को यह परंपरा हाशिए में चली गई। कलश संगीत कला समिति के अध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया ने बताया कि बताया कि 2014 में बंद हुई होली के संरक्षण के लिए फिर से पहल की गई है। बताया कि चौबे होली को चाराल क्षेत्र के लोग राजवंश के सम्मान में गाते थे। चौबे होली चंद राजवंश की सांस्कृतिक विरासत की चमकदार परंपरा थी लेकिन एक दशक से यह शानदार परंपरा अतीत का हिस्सा बन गई है। राजवंश के सम्मान में होने वाली इस होली का गायन तड़ागी, बोरा, कार्की और चौधरी जाति के लोग राज दरबार में करते थे।