बागेश्वर में पूर्व सीएम हरीश रावत ने पौंसारी गांव को खतरे की जद में बताते हुए दोबारा आपदा से प्रभावित होने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि पौंसारी गांव को विस्थापित करने की जरूरत थी। अगर सरकार पूरे गांव का विस्थापन नहीं कर सकती थी तो खतरे वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान बसाना चाहिए था। शुक्रवार को पूर्व सीएम रावत ने कनलगढ़ घाटी के आपदा प्रभावित गांव पौंसारी का भ्रमण कर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि आपदा से गांव के पीछे बने दो-तीन नाले भविष्य में फिर से आपदा का कारण बन सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र में चल रहे पुननिर्माण कार्यों पर निराशा जताई। कहा कि क्षेत्र में साल 2022 में आई आपदा को जख्म अब भरे जा रहे हैं। विगत 28 अगस्त को आई आपदा के कार्य कब होंगे, इसका कोई पता नहीं है। आपदा में मिले रुपये से बड़े काम किए जाने थे, लेकिन छोटे काम भी नहीं हो रहे हैं। कहा कि प्रशासन स्तर पर तो सक्रियता है, लेकिन शासन स्तर पर उदासीनता बरती जा रही है। मंत्री आपदा प्रभावित क्षेत्रों की सुध नहीं ले रहे हैं। डीएम स्तर पर सारे काम छोड़ दिए हैं। सुधारीकरण के कार्य में विभागों का समन्वय भी नहीं दिख रहा है। उन्होंने 2014 और 2026 में सहायता या मुआवजा राशि एक समान होने पर सवाल उठाए। कहा कि राशि अब दोगुनी होनी चाहिए थी। उन्हाेंने सड़कों के दुरुस्त नहीं होने, गूल और पुलियाओं का काम पूरा नहीं होने को भी निराशाजनक बताया और गुणवत्ता में भी सुधार लाने की आवश्यकता बताई। इस मौके पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, गोपाल दत्त भट्ट, सुनील भंडारी आदि मौजूद रहे।