प्रदेश के स्वास्थ्य, शिक्षा और सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत बुधवार को बागेश्वर जिले के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे। सहकारिता मेले में प्रतिभाग करते हुए उन्होंने सरकार की जमकर उपलब्धियां गिनाई। जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली को लेकर जब उनसे सवाल पूछे गए तो वह उनसे बचकर निकल गए। इन दिनों की जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी और स्कूलों में शिक्षकों की कमी जिले की प्रमुख समस्या बनी हुई है। बागेश्वर जिले के सबसे बड़े अस्पताल जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिले के नियुक्त 13 चिकित्सकों में से नियुक्ति के एक महीने बाद भी पांच चिकित्सकों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रसंख्या में साल दर साल गिरावट आ रही है। एलटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद कई अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। लंबे समय के बाद जिले में आ रहे मंत्री से लोगों की बहुत सारी उम्मीदें थी। बुधवार को नुमाइश खेत मेले में आयोजित सहकारिता मेले में प्रतिभाग करने पहुंचे मंत्री डॉ. रावत ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया। मंच से सरकार की उपलब्धियों को जमकर बखान किया। उन्होंने अपने भाषण में राज्य की एक लाख 85 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने, मोटे अनाजों की कीमत बढ़ाने जिले में 13 नए चित्सिक भेजने, काफलीगैर में डिग्री कॉलेज के लिए भूमि चयन प्रक्रिया को पूरा करने, कपकोट सीएचसी को उपजिला चिकित्सालय बनाने की उपलब्धियां बताई। उन्होंने महिलाओं को अब स्वरोजगार के लिए बिना गांरटी के जीरो प्रतिशत पर लोन उपलब्ध कराने, रेहड़ी और फड़ व्यवसायियों को नौ नवंबर के बाद ऋण सुविधा देने, राज्य के 95 ब्लॉकों में माधो सिंह भंडारी के नाम से सामूहिक खेती कराने ओर दोफाड़, असों, पिंगलों, स्यांकोट में दो हजार खाते खोलने की शर्त पर कॉपरेटिव बैंक खोलने की घोषणा की। कार्यक्रम के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए सहकारी मेले की जानकारी दी। जिले में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर जब उनसे सवाल पूछे तो वह किनारे से बचकर निकल गए। भीड़ में मौजूद लोगों ने मंत्री से जिला अस्पताल के निरीक्षण का आग्रह किया। लेकिन मंत्री डॉ. रावत समय की कमी बताकर बच निकले।