भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी के मानवतावादी अध्ययन विभाग द्वारा भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं विरासत श्रृंखला के अंतर्गत ‘भारत की पांडुलिपीय विरासत’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य उद्घाटन मंगलवार को देव एवं वर्धना गोस्वामी हॉल में किया गया। कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. विनिता चंद्रा ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों में पांडुलिपीय विरासत के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, उन्हें इसके संरक्षण एवं अध्ययन से जुड़े बुनियादी कौशलों से परिचित कराना तथा पांडुलिपि-विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्ध संभावित करियर अवसरों से अवगत कराना है। अपने स्वागत वक्तव्य में उन्होंने हेरिटेज कॉन्शसनेस अर्थात विरासत के प्रति चेतना जागृत करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।