हरिश्चंद्र घाट पर लोगों की आंखें उस समय नम हो गई जब संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक, नागपुर के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी एवं उनकी पत्नी श्रीमती बादामी देवी की चिता में उनके पुत्र उनके बड़े पुत्र राजगोपाल त्रिपाठी ने मुखाग्ने दी।