काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका पर शवदाह के दौरान उत्सव जैसा नजारा दिखा। पक्का महाल से आए बेटे ने पिता की चिता पर आखिरी भेंट के रूप में शराब गिराई। बनारसी पान के साथ बीड़ी भी रखा। बेटे ने कहा कि पिता की कोई इच्छा अधूरी न रहे, इसलिए अंतिम औपचारिकता पूरी की है। यह दृश्य आम बनारसियों के लिए सामान्य तो बाहर से आए लोगों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था। वे भौचक्का होकर एकटक देख रहे थे कि इसी बीच महाश्मशान हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। जो लोग वहां थे। वे बुदबुदाने लगे। कहने लगे कि वाकई अनूठी है काशी। अल्हड़ हैं यहां के वासी। मृत्यु पर शोक नहीं मनाते हैं। उत्सव के साथ अंतिम संस्कार करते हैं।