वाराणसी में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। शहर में 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का आलम पूरे अकीदत और गमगीन माहौल के बीच उठाया गया। यह जुलूस सुबह करीब 11 बजे इमामबाड़ा कच्ची सराय, दालमंडी से शुरू हुआ। आलम की देखरेख सैयद इकबाल हुसैन और जफर हसन ने की। जुलूस का नेतृत्व अंजुमन जावादिया ने किया। यह दालमंडी, नई सड़क, फाटक, सलीम काली महाल और पितरकुंडा से गुजरा। जुलूस फातमान पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। अंजुमन जावादिया के नोहाख्वां साजिद हुसैन ने नोहा पढ़े। इनमें शायर कविश बनारसी का लिखा नोहा "गूंजी है कर्बला में सदा, मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा, मैं हुसैन हूं" शामिल था। नोहाख्वानी और मातम से वातावरण गम और अकीदत से भर गया। कई अकीदतमंद इस दौरान भावुक भी हो उठे।