कैसे एक नदी अपनी पूरी यात्रा के दौरान तलछट जमा करती चलती है और अंतत: जब समुद्र से मिलती है तो अपना संपूर्ण अस्तित्व खो देती है। यह गौतम बुद्ध के निर्वाण प्राप्ति को दर्शाता है। गुरुवार को नागरी नाटक मंडली के मंच पर निर्माण से निर्वाण की प्रस्तुति में श्रोताओं को भी इसका अहसास हुआ।