अगड़म बगड़म जूता रगड़म, ब्याह कराऊं पकड़म धकड़म...के उटपटांग मंत्रों से गंगा किनारे डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर विवाह की रस्में निभाई जा रही हैं। महिला दूल्हा और पुरुष दुल्हन की शादी करा रहा पुरोहित मंत्रों को उलट-पलट कर बोल रहा है और सामने बैठी जनता पेट पकड़कर हंस रही है। यह नजारा महामूर्ख मेले में नजर आया। इस अवसर पर महामूर्ख सम्मान के तहत रावण मुकुट और हनुमान जी की गदा हास्य कवि शंभू शिखर को प्रदान किया गया।