सवा सौ साल से भी अधिक प्राचीन शिवानगर औरंगाबाद की रामलीला में बृहस्पतिवार को नक्कटैया की लीला हुई। छह घंटे तक अनवरत पांच किलोमीटर की दायरे में 40 लाग विमान पर देवी-देवताओं के दर्शन हुए। कहीं मां काली का रौद्र रूप सजा तो कहीं भगवान शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण और राम दरबार की झांकी। बृहस्पतिवार की रात में 11:30 बजे प्राचीन श्रीराम लीला कमेटी की लीला में लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी। नाक कटने के बाद चिल्लाती हुई शूर्पणखा अपने भाइयों खर-दूषण के पास मदद के लिए जाती है। इसके साथ ही औरंगाबाद की रामलीला के लाग विमानों का निकलना शुरू हो गया। 40 लाग विमानों में कानपुर से आई मां काली की झांकी, नाटी इमली की मां दुर्गा की झांकी हर किसी के आकर्षण का केंद्र रहे। लाग विमान सिद्धगिरिबाग से कस्तूरबा नगर, सोनिया, औरंगाबाद चौराहे से लहंगपुरा, पितरकुंडा, पानदरीबा से शेख सलीम फाटक होते हुए औरंगाबाद चौराहे पर पहुंची। औरंगाबाद से रामलीला मार्ग से भोर में लक्सा थाने पर पहुंचकर लाग विमान अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष प्रकाशपति त्रिपाठी,रामराजजी, मुन्ना सिंह, संकट दादा, रोहित चौरसिया, गप्पू सिंह सहित लीला समिति के लोग शामिल रहे।