महाशिवरात्रि पर काशी ने फिर साबित कर दिया कि यहां पर्व नहीं, परंपरा चलती है। डमरुओं की गूंज, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच जब शिव वर की झांकी आगे बढ़ी तो लगा मानो देवलोक धरा पर उतर आया हो। रंग-गुलाल से सराबोर बरात में आस्था, लोकसंस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम दिखा। देखें- तस्वीरें