देव दीपावली पर गंगा घाटों पर लाखों दीप जलाने की तैयारी है। खास बात ये कि घाटों पर गाय के गोवर से बने दीप भी जलाए जाएंगे। इन दीपों को बनाने का काम स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं। सात स्वयं सहायता समूहों की 25 परिवारों की महिलाएं इस कार्य में जुटी हैं। उनका लक्ष्य 30,000 दीप तैयार करना है। देव दीपावली के मौके पर गाय के गोबर से बने दीपों का निर्माण कर रही महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। पहले जहां देव दीपावली पर महिलाएं मुश्किल से 400-500 रुपये कमाती थीं, अब उन्हें इस कार्य के लिए लगभग चार हजार से पांच हजार रुपये की आय हो रही है। ग्राम अहरक की राधिका ने बताया कि पहले उन्हें दीपों को बेचने के लिए घर-घर जाना पड़ता था, लेकिन अब प्रदेश सरकार के प्रयासों से उन्हें पहले से ही आर्डर मिल जाते हैं। इससे उनकी आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है। 15 नवंबर को देव दीपावली पर 12 लाख दीपों से घाट रोशन होंगे, जिसमें गाय के गोबर से बने दीप भी शामिल होंगे।