बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय की ओर से पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में कौस्तुभ जयंती समारोह के उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर उपशास्त्रीय गायिका डॉ. सोमा घोष का व्याख्यान हुआ। उन्होंने संगीत कला के क्षेत्र में स्वविकास एवं व्यावसायिक विकास में संतुलनपरक दृष्टि का महत्व : एक सांगीतिक विमर्श विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने व्यावसायिक विकास के रोचक किस्से भी सुनाए। ठुमरी- जाग पड़ी पिया के जगाए..., राग बागेश्री में निबद्ध ख्याल अंग की गजल- फासले भी ऐसे होंगे, ये कभी सोचा न था... सुनाया। उनके साथ तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती, संवादिनी पर राघवेंद्र शर्मा ने संगत की। संकाय प्रमुख प्रो. संगीता पंडित ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन कृष्ण कुमार तिवारी ने किया।