गोसाईंगंज के भोंए गांव में टीकाकरण के बाद 10 बकरियों और एक बकरे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सोमवार को गांव में पशु चिकित्सा टीम ने 32 बकरियों का टीकाकरण किया था। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके कुछ घंटे बाद पशुओं की तबीयत बिगड़ने लगी और रात तक 11 पशुओं की मौत हो गई। घटना के बाद पशुपालकों में दहशत है। मृत बकरियों में कई गर्भवती बताई गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दूबेपुर ब्लॉक से तीन सदस्यीय टीम सोमवार सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच एंबुलेंस से गांव पहुंची थी। टीम ने एक स्थान पर वाहन खड़ा किया, जहां ग्रामीण अपने बकरे-बकरियों को टीका लगवाने लेकर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि जुकाम, बुखार और पेट संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए गए। इसके लिए प्रति पशु 10 रुपये भी लिए गए। ग्रामीणों के मुताबिक, टीकाकरण के बाद सोमवार शाम करीब छह बजे से रात 12 बजे के बीच पशुओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। देखते ही देखते कई पशुओं की मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में हर तीन-चार महीने पर टीकाकरण के लिए टीम आती है, लेकिन इस तरह की घटना पहली बार हुई है। चार पशुपालकों के पशु प्रभावित गांव निवासी रेहाना बानो की सात बकरियों को टीका लगाया गया था, जिनमें से चार की मौत हो गई। रुबीना ने नौ बकरियों और एक बकरे का टीकाकरण कराया था। इनमें पांच बकरियों की मौत हो गई, जबकि एक बकरी और एक बकरे की हालत गंभीर बताई गई। जमाल नासिर के 12 पशुओं में से एक बकरी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बीमार हो गए। वहीं, अकबाल की तीन बकरियों और दो बकरों में से एक बकरी की मौत हो गई। उनका एक बकरा भी गंभीर हालत में बताया गया। घटना की सूचना पर गोसाईंगंज पुलिस ने दो बार गांव पहुंचकर जांच की। पुलिस ने मृत पशुओं की तस्वीरें लेने के साथ ही संबंधित जानकारी जुटाई। एसओ गोसाईंगंज ने पशुओं की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सक की ओर से पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे। सीवीओ बोले, घास खाने से हुई पॉइजनिंग मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) सुनील कुमार ने बताया कि गांव में 32 बकरियों का टीकाकरण किया गया था। इसके बाद घास खाने से पॉइजनिंग होने की बात सामने आई है। प्रभावित पशुओं को ड्रिप समेत जरूरी उपचार दिया गया, लेकिन एक-एक कर 10 पशुओं की मौत हो गई। एक पशु का इलाज जारी है। मौत के कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।