'जब तक मोक्ष की इच्छा रहेगी व्यक्ति ईश्वर को नहीं पा सकता। जो मुक्त हो जाते हैं वह भी भगवान राम की शरण चाहते हैं। मुक्त भगवान के गले का मुक्ताहार बनता है और भक्त भगवान के चरणों की सेवा करता है।' यह बातें चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने कहीं। वह विजेथुआ महोत्सव के आठवें दिन शुक्रवार को वाल्मीकि रामायण की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राम सीता और लक्ष्मण यही तीन हमारे आराध्य हैं। रामायण में वाल्मीकि कहते हैं राम परमात्मा सीता भक्ति व लक्ष्मण वैराग्य हैं। वैराग्य और भक्ति से ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। आयोजक विवेक तिवारी के अनुज डॉ रत्नेश तिवारी ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन किया। तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने गुरु अर्चन किया। इस अवसर पर विधायक राजेश गौतम गोपाल राय विश्व हिंदू गोरक्षा दल आशुतोष सिंह मोहित, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, चेयरमैन आनंद जायसवाल, आनन्द द्विवेदी, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह, रवि समेत अनेक प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे।