सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में एक असाध्य रोग पीड़ित महिला और उसके बीमार बेटे को शुक्रवार शाम कथित तौर पर अस्पताल से बाहर कर दिया गया। महिला ने अस्पताल स्टाफ पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। उड़ीसा निवासी बबिता कौल (जो पहले प्रदर्शनी में मौत का कुआं में बाइक चलाती थी) एक दुर्घटना में घायल हो गई थी। बीएचयू में डॉक्टरों ने 80 हजार रुपये में ऑपरेशन की सलाह दी। पैसों की कमी के कारण वह सुल्तानपुर आई। यहां 20 हजार रुपये में इलाज की बात कही गई। रास्ते में उसके बेटे राजा कौल की तबीयत बिगड़ गई। राजा किडनी का मरीज है। बबिता ने अपना इलाज टालकर चार दिन पहले बेटे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। उसका आरोप है कि स्टाफ उसे बेटे के पास रहने नहीं दे रहा था। खाना-खाने के बाद उसने जूठन डस्टबिन में डाला तो सुरक्षाकर्मियों ने विरोध किया। कथित तौर पर अभद्रता की। उन्होंने जबरन डिस्चार्ज पेपर बनाकर दोनों को बाहर कर दिया। इसके बाद महिला ने अस्पताल के सामने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। सूचना पर पहुंची महिला पुलिस ने स्थिति को संभाला। मां-बेटे को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया। सीएमएस डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि महिला पीने के पानी की टंकी के पास बर्तन धो रही थी। गार्ड ने उसे ऐसा करने से रोका तो वो उससे उलझ गई। स्वयं सामान उठाकर जाने लगी। इस पर गार्ड ने सामान चेक कराने को कहा, तब भी उसने हंगामा किया। अंत में ईएमओ डॉ. रवींद्र ने उसके बच्चे को पुनः एडमिट किया है।