रॉबर्ट्सगंज के आरटीएस क्लब में श्रीरामचरितमानस नवाह्न पाठ में शनिवार को श्रीराम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के वनवास की झांकी सजाई गई। मानस की चौपाई का गायन करते आचार्य सूर्यलाल मिश्र ने संदेश दिया कि अगर भगवान श्रीराम का वनवास लोक कल्याण के लिए था। अगर वनवास न होता तो विश्व का कल्याण न होता। ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों को सताने वाले राक्षसों का नाश न होता। उनकी माता कैकई को वनवास का सुझाव देने वाली मंथरा इसका माध्यम बनी। वनवास के मार्मिक प्रसंग को सुनकर भक्तों की आंखें भर आई। वहीं रात्रि प्रवचन में कथावाचक हेमंत त्रिपाठी एवं अनिल पांडेय ने धनुष यज्ञ की कथा सुनाई। कथा के द्वितीय सत्र में परशुराम संवाद पर कथा वाचक प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने कहा कि धनुष के टूटने की आवाज से सारा भुवन में नाद हुआ, जिसकी आवाज सुनकर परशुराम यज्ञ स्थल पर आ गए। उन्हें देख कर सारे राजा भयभीत हो गए। उन्होंने विवाह प्रसंग पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। मंच का संचालन आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष सत्यपाल जैन, महामंत्री सुशील पाठक, पप्पू शुक्ला, शिशु तिवारी, किशोर केडिया, सुधाकर दुबे, विमलेश पटेल, सुंदर केसरी, राजेश केसरी, सुशील (लोढ़ी), रविंद्र पाठक, मन्नू पांडेय आदि मौजूद रहे।