नई पेंशन योजना (एनपीएस), यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (यूपीएस) और सरकारी विभागों के निजीकरण के खिलाफ शुक्रवार को अटेवा के बैनर तले शिक्षक-कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। रामलीला मैदान से बाइक जुलूस लेकर बढ़ौली चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जमकर नारे लगाते हुए रोष प्रकट किया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। अटेवा से संतोष कुमारी और वकील अहमद ने कहा कि सरकार शिक्षक-कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन पर जबरन एनपीएस और यूपीएस थोपा जा रहा है। जब तक पुरानी पेंशन (ओपीएस) बहाल नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा। रंजना सिंह और सुरेश कन्नौजिया ने निजीकरण को गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाफ साजिश बताया। रविभूषण सिंह और रविंद्र चौधरी ने आगाह किया कि समय रहते निजीकरण नहीं रोका गया तो सरकारी नौकरी का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि अगर नेता और न्यायपालिका पुरानी पेंशन पा सकते हैं, तो कर्मचारी इससे वंचित क्यों किए जा रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन में कौसर जहां, प्रभा शंकर, सूर्यप्रकाश सिंह, बबिता, कमलेश सिंह, संतोष सिंह, मनोज, रामचंद्र, अजय कुशवाहा आदि शिक्षक-कर्मचारी शामिल रहे।