तराई में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की नर्सरी डालने का काम तेज है। बावजूद इसके समितियों पर खाद का टोटा है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है और किसान एक बोरी खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इकौना क्षेत्र की कई समितियों पर खाद के अभाव में ताला लटकता नजर आ रहा है। खाद की कमी का दंश गन्ना किसानों को भी झेलना पड़ रहा है और किसान गन्ने में खाद की ट्राप ड्रेसिंग के लिए कई किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं। प्रस्तुत है पड़ताल करती हुई एक रिपोर्ट.... कहीं सचिव तो कहीं खाद न होने से लटक रहा ताला इकौना तहसील क्षेत्र की कई समितियों पर बीते कई महीनें से खाद का आवंटन नहीं किया गया है। सोमवार को की गई पड़ताल में बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति कल्यानपुर कटरा व बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति इकौना में ताला लटकता नजर आया। स्थानीय किसानों ने बताया कि इन समितियों पर नए सचिव के कार्यभार ग्रहण करने को लेकर असमंजस बना हुआ है। यही कारण है कि खाद का आवंटन नहीं हुआ है। वहीं, इफको से संबंधित दुकानों आईएफडीसी और एग्री जंक्शन पर भी अप्रैल माह से खाद का आवंटन नहीं किया गया है। नई बनी समितियों गोपालपुर, रामापुर, परशुरामपुर आदि को खाद का आवंटन तो हुआ है लेकिन यहां आवंटन ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। किसानों का एक से दो बोरी ही खाद मिल रही है। किसान फार्मर आईडी बनवाने के बाद भी खाद नहीं पा रहे हैं। बोले किसान, निजी दुकानों का ही सहारा रमवापुर डकाही निवासी किसान स्वामीनाथ तिवारी ने बताया कि समितियों पर किसान नहीं है। बाजार में निजी दुकानों पर भी खाद कम है, जिसके चलते निजी दुकान संचालक निर्धारित रेट से अधिक रुपये वसूल रहे हैं। नर्सरी डालने में दिक्कत हो रही है। चक्र भंडार निवासी किसान मनोहर लाल वर्मा ने बताया कि खाद के लिए बहुत से प्रपत्र मांगे जा रहे हैं। 40 बीघा खेत में धान की रोपाई करनी है। 15 बोरी खाद यूरिया की आवश्यकता है लेकिन अभी केवल एक बोरी मिली है। सरकार को चाहिए कि समितियों पर खाद उपलब्ध करवाए।