फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO : श्रावस्ती: कोरियाई दल ने तपोस्थली में की विशेष प्रार्थना, बड़ी संख्या में मौजूद रहे अनुयायी

बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही। कोरिया से आए 42 सदस्यीय दल ने रविवार को जेतवन परिसर का भ्रमण कर गंध कटि पर भिक्षु देवानं के नेतृत्व में प्रार्थना की। इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध दुख व उसके कारक व उसके निदान पर आत्म मीमांसा की थी। दुख है तो उसका कारण भी है। यदि कारण का निदान हो जाए तो दुख से मुक्ति मिलेगी। दुख का कारण अंधकार है। अंधकार का तात्पर्य मन के अंधकार से है। इस अंधकार का कारण अज्ञान है। व्यक्ति अज्ञानता वश यह मेरा है, यह तेरा है, मैं हूं और सिर्फ मैं हूं के चक्कर में पड़ा रहता है। व्यक्ति जब से पैदा होता है तब से अपने दुख के द्वार स्वयं खोल लेता है। पैदा होते ही व्यक्ति अपने मन में अपनी ही एक मूर्ति स्थापित करता है। फिर धीरे धीरे उसका पोषण करता रहता है। यह मन की मूर्ति जो अज्ञान से बनती है। वह धीरे धीरे बड़ी होती जाती है। यह मूर्ति अहम की है। आदमी सोचता है कि मैं इतना बड़ा हूं, इतना महान हूं। मेरे अतिरिक्त संसार में कुछ भी नहीं। यही सोचते सोचते वह तृष्णा की चपेट में आ जाता है और जीवन भर दुख से घिरा रहता है। यदि व्यक्ति को इन दुखों से मुक्ति चाहिए तो उन्हें अपने अंधकार से बाहर निकलना होगा। उन्हें स्वयं व संसार के प्रति तटस्थ भाव में आना होगा। यानी कि यदि सुख की अनुभूति हो रही है तो उसके प्रति अशक्तता नहीं दिखानी है। इसी प्रकार यदि दुख है तो निराश नहीं होना है क्योंकि सब कुछ क्षण भंगूर है। इस दौरान काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें